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हरिशंकर सैनी 

देहरादून। राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस 2026 के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर, हर्रावाला की ओर से गढ़ी कैंट स्थित डीडी कॉलेज में स्वास्थ्य शिविर एवं स्वास्थ्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद आधारित स्वस्थ जीवनशैली, रोगों से बचाव और स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा।

यह आयोजन नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशन में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस 2026 की गतिविधियों के अंतर्गत किया गया। कार्यक्रम का संचालन मुख्य परिसर के कैंपस डायरेक्टर प्रोफेसर पंकज शर्मा के मार्गदर्शन में हुआ। मुख्य परिसर के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव कुरेले तथा आयुर्वेद संकाय के नोडल अधिकारी एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ऋषि आर्य ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

‘आने वाले कल के लिए आयुर्वेद’ विषय पर हुआ संवाद

डीडी कॉलेज में आयोजित स्वास्थ्य संगोष्ठी में शिक्षकगणों को “Ayurveda for Healthier Tomorrow” विषय पर संबोधित करते हुए स्वस्थ जीवनशैली और आयुर्वेद की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ता ने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, तनाव और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में रोग होने के बाद उपचार के साथ-साथ रोगों से बचाव और स्वास्थ्य संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

संगोष्ठी में यह समझाने का प्रयास किया गया कि आयुर्वेद केवल बीमारी के उपचार तक सीमित चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और जीवनशैली को संतुलित बनाए रखने पर भी विशेष जोर देता है।

इस दौरान आने वाले समय में स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने, रोगों से बचाव एवं आरोग्य को मजबूत करने, प्राकृतिक तरीके से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और जीवनशैली को बेहतर बनाने तथा स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेद की दिनचर्या एवं स्वास्थ्यवर्धक सिद्धांतों को अपनाने पर चर्चा हुई।

शिक्षकगणों को दिलाए गए पांच स्वास्थ्य संकल्प

कार्यक्रम के दौरान डीडी कॉलेज के शिक्षकगणों को स्वस्थ जीवन के लिए पांच स्वास्थ्य संकल्प भी दिलाए गए। इनमें संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित दिनचर्या, शारीरिक सक्रियता, पर्याप्त विश्राम तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने जैसे जीवनोपयोगी संकल्पों पर जोर दिया गया।

वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ समाज का निर्माण तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लेकर जिम्मेदारी समझे और दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव अपनाए। आयुर्वेद की दिनचर्या, ऋतुचर्या और स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़े सिद्धांतों को व्यवहार में लाकर जीवन को अधिक संतुलित बनाया जा सकता है।

स्वास्थ्य शिविर में दिया आयुर्वेदिक परामर्श

संगोष्ठी से पूर्व प्रातःकाल स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया। शिविर में लोगों को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्रदान किया गया। चिकित्सकों ने लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, खानपान में संतुलन रखने तथा दैनिक जीवन में स्वास्थ्यवर्धक आदतों को शामिल करने के प्रति जागरूक किया।

स्वास्थ्य शिविर में आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य संरक्षण और रोगों से बचाव की संभावनाओं की जानकारी भी दी गई। लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और आवश्यकता पड़ने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर मुख्य परिसर के सह-संयोजक डॉ. ऋषि आर्य, असिस्टेंट प्रोफेसर, द्रव्यगुण विज्ञान भी उपस्थित रहे। आयोजन में डीडी कॉलेज के शिक्षकगणों की सहभागिता रही।

कार्यक्रम के समापन पर स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेद के महत्व पर जोर देते हुए कहा गया कि स्वास्थ्य को केवल बीमारी की अनुपस्थिति के रूप में नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी संपदा के रूप में देखना चाहिए। नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, सकारात्मक सोच और आयुर्वेद के स्वास्थ्यवर्धक सिद्धांतों को अपनाकर स्वस्थ एवं जागरूक समाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

आयोजकों ने लोगों से आह्वान किया कि वे आयुर्वेद को अपनी दैनिक जीवनशैली से जोड़ें और स्वयं स्वस्थ रहने के साथ-साथ परिवार एवं समाज को भी स्वस्थ बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।

By admin

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